Published 5 days agoबनारस की शापित हवेली
अध्याय 1 - रहस्यमयी पार्सलदिल्ली...जुलाई की एक बरसाती शाम।बारिश की बूँदें खिड़की के शीशों से टकराकर मधुर आवाज़ पैदा कर रही थीं। कमरे में फैली किताबों और पुराने नक्शों के बीच बैठी नैना त्रिपाठी अपने लैपटॉप पर अगली किताब का आख़िरी अध्याय पूरा कर रही थी।तभी दरवाज़े की घंटी बजी।"इस समय कौन हो सकता