Tumhari Nazar Kaafi Nahi

एक छोटे से गाँव में एक स्कूल था, जहाँ एक अध्यापक अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह अपनी पत्नी से बेइंतहा प्यार करता था और उसे अपनी पलकों पर बिठाकर रखता था। एक दिन, गाँव में एक डॉक्टर रहने आया और अध्यापक तथा डॉक्टर के बीच गहरी दोस्ती हो गई। डॉक्टर का अध्यापक के घर आना-जाना शुरू हो गया।
एक दिन, अध्यापक की पत्नी अचानक बीमार पड़ गई। अध्यापक ने अपने डॉक्टर मित्र को घर बुलाया। बाहर जोरों की बारिश हो रही थी, लेकिन डॉक्टर अपने मित्र की खातिर अध्यापक के घर उसकी पत्नी को देखने गया। अध्यापक की पत्नी काफी बीमार थी और डॉक्टर ने उसका इलाज किया। इस दौरान तीनों की दोस्ती और भी गहरी हो गई।
एक दिन, डॉक्टर ने हिचकिचाते हुए अपने मित्र से कहा, "मैं तुमसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ। बस मेरे प्रश्न पूछने पर गुस्सा मत करना।"
अध्यापक ने कहा, "पूछो।"
डॉक्टर ने कहा, "तुम्हें याद है, जब तुम्हारी पत्नी सख्त बीमार थी और मैंने उसका इलाज किया था? अगर उनका निधन हो जाता, तो क्या तुम्हें लगता है कि तुम्हें इससे अच्छी पत्नी मिल जाती, क्योंकि तुम्हारी पत्नी दिखने में साधारण है?"
अध्यापक मित्र ने जो उत्तर दिया, उसे सुनकर डॉक्टर हक्का-बक्का रह गया।
अध्यापक ने कहा, "डॉक्टर मित्र, मेरी पत्नी की ओर देखते समय सिर्फ तुम्हारी नज़र काफी नहीं। तुम पत्नी की ओर देखते समय मेरी नज़र को अपनी नज़र में जोड़ दो।"
तात्पर्य:
इस कहानी का तात्पर्य यह है कि सिर्फ दिखाई देना महत्वपूर्ण नहीं है। सच्चा प्यार और संबंध आंतरिक गुणों और भावनाओं पर आधारित होते हैं, न कि बाहरी दिखावे पर। अध्यापक की पत्नी की सुंदरता उसके लिए उसकी नज़र में थी, जो उसके प्यार और सम्मान को दर्शाती थी। डॉक्टर ने अध्यापक की पत्नी का शरीर ही मात्र देखा, जिसमें कोई सम्मान नहीं था।
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