आखिरी बार तुमसे प्यार किया

मुंबई की बारिश हमेशा से मीरा को पसंद थी।
शायद इसलिए नहीं कि बारिश खूबसूरत होती है, बल्कि इसलिए कि बारिश में इंसान अपने आँसू आसानी से छुपा सकता है।
उस रात भी बारिश हो रही थी।
मीरा अपने छोटे-से अपार्टमेंट की खिड़की के पास बैठी कॉफी पी रही थी। रात के ठीक 11 बजकर 11 मिनट हुए थे, तभी उसके फोन पर एक अनजान नंबर से मैसेज आया।
“कल शाम 7 बजे उसी कैफ़े में जाना, जहाँ तुमने उसे पहली बार देखा था।”
मीरा ने तुरंत जवाब दिया—
“कौन हो तुम?”
कुछ सेकंड बाद जवाब आया—
“जिसे तुमने पाँच साल पहले खो दिया था।”
मीरा के हाथ से फोन लगभग छूट गया।
पाँच साल।
यही तो समय हुआ था उस हादसे को।
उस हादसे में उसने अपना प्यार—आरव—खो दिया था।
आरव की मौत के बाद मीरा ने शहर, कॉलेज, दोस्त... सब कुछ बदल दिया था। लेकिन एक चीज़ कभी नहीं बदली थी—उसके दिल में आरव की जगह।
अगली शाम वह उसी पुराने कैफ़े में पहुँची।
वह जगह जहाँ पाँच साल पहले आरव ने पहली बार उससे कहा था—
“तुम्हें देखकर लगता है जैसे मैं तुम्हें बहुत पहले से जानता हूँ।”
मीरा अकेली बैठी थी।
तभी उसके सामने एक आदमी आकर बैठ गया।
मीरा ने जैसे ही उसे देखा, उसकी साँस अटक गई।
वह चेहरा...
वही आँखें...
वही मुस्कान...
आरव।
मीरा कुछ बोल ही नहीं पाई।
उस आदमी ने धीरे से कहा—
“इतनी जल्दी भूल गई?”
मीरा की आँखों में आँसू आ गए।
“आरव?”
उसने मुस्कुराकर कहा—
“हाँ, मीरा।”
मीरा उसके सामने बैठी रही। उसका दिमाग कह रहा था कि यह असंभव है, लेकिन उसका दिल सिर्फ एक बात कह रहा था—
आरव वापस आ गया है।
उस शाम दोनों ने घंटों बातें कीं।
आरव को उसकी हर छोटी-बड़ी बात याद थी।
उसे पता था कि मीरा कॉफी में चीनी नहीं लेती।
उसे पता था कि बारिश में मीरा हमेशा खिड़की के पास बैठती है।
उसे पता था कि मीरा डरने पर अपने दाहिने हाथ की अंगूठी घुमाती है।
यह वही आरव था।
कम से कम मीरा को ऐसा ही लग रहा था।
अगले कुछ दिनों में दोनों फिर मिलने लगे।
उनके बीच वही पुराना प्यार लौट आया।
लेकिन एक बात अजीब थी।
जब भी मीरा आरव से पूछती कि वह पाँच साल तक कहाँ था, आरव बात बदल देता।
एक रात मीरा ने उससे सीधा सवाल किया—
“अगर तुम ज़िंदा थे तो मेरे पास वापस क्यों नहीं आए?”
आरव ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा—
“क्योंकि अगर मैं वापस आता... तो तुम्हारी जान चली जाती।”
मीरा के चेहरे पर डर उतर आया।
“किससे बचा रहे थे मुझे?”
आरव ने जवाब नहीं दिया।
उस रात मीरा को फिर एक मैसेज आया।
“उस पर भरोसा मत करना।”
मीरा ने नंबर पर कॉल किया।
फोन बंद था।
अगला मैसेज आया—
“आरव वो नहीं है जो तुम समझ रही हो।”
मीरा ने मैसेज डिलीट कर दिया।
क्योंकि वह आरव पर भरोसा करना चाहती थी।
उसे पाँच साल बाद अपना प्यार मिला था।
वह उसे दोबारा खोना नहीं चाहती थी।
लेकिन अगले दिन उसे अपने अपार्टमेंट में एक पुराना envelope मिला।
अंदर एक photograph थी।
फोटो में मीरा और आरव थे।
लेकिन उनके पीछे एक तीसरा आदमी भी खड़ा था।
फोटो के पीछे सिर्फ एक तारीख लिखी थी—
“हादसे से एक दिन पहले।”
मीरा उस फोटो को देखकर सन्न रह गई।
उसे तीसरे आदमी का चेहरा जाना-पहचाना लग रहा था।
लेकिन याद नहीं आ रहा था।
तभी आरव उसके घर आया।
मीरा ने फोटो उसके सामने रख दी।
आरव का चेहरा देखकर ही मीरा समझ गई कि वह इस आदमी को जानता है।
“कौन है ये?”
आरव चुप रहा।
“आरव, मैं पूछ रही हूँ—कौन है ये?”
आरव ने धीरे से कहा—
“कबीर।”
“कबीर कौन?”
आरव ने जवाब दिया—
“मेरा दोस्त।”
मीरा ने पूछा—
“और ये फोटो?”
आरव ने नज़रें झुका लीं।
“ये फोटो उस रात की है, जब हमारा accident हुआ था।”
मीरा चौंक गई।
“तुम्हें accident याद है?”
आरव ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“फिर मुझे क्यों नहीं?”
आरव ने बहुत धीरे से कहा—
“क्योंकि तुमने मुझे बचाने के लिए खुद अपनी याददाश्त मिटाई थी।”
मीरा कुछ समझ नहीं पाई।
आरव ने उसे बताया कि पाँच साल पहले कबीर ने उन दोनों को मारने की कोशिश की थी। वजह थी—कबीर मीरा से प्यार करता था और आरव से नफरत।
उस रात कार का accident हुआ।
आरव बच गया।
मीरा भी बच गई।
लेकिन मीरा को गंभीर चोट लगी और डॉक्टरों ने बताया कि उसकी कुछ यादें चली गई थीं।
आरव ने अपनी पहचान छुपा ली ताकि कबीर उसे ढूँढ़ न सके।
मीरा की आँखों में आँसू थे।
“तो तुम पाँच साल से मुझे दूर से देखते रहे?”
आरव ने मुस्कुराकर कहा—
“हर जन्मदिन पर।”
“हर बारिश में?”
“हर बारिश में।”
“फिर अब क्यों आए?”
आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“क्योंकि अब मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता।”
मीरा ने पहली बार बिना डर के उसका हाथ पकड़ लिया।
दोनों के बीच फिर वही प्यार लौट आया।
लेकिन उसी रात मीरा के फोन पर एक आखिरी मैसेज आया—
“अब उसे अपने कमरे की अलमारी खोलने दो।”
मीरा ने आरव से कुछ नहीं कहा।
उसने अलमारी खोली।
अंदर एक छोटा black box रखा था।
उसमें एक pen drive थी।
मीरा ने laptop में pen drive लगाई।
एक video चला।
Video में...
मीरा खुद बैठी थी।
वही चेहरा।
वही आवाज़।
लेकिन video पाँच साल पुराना था।
वीडियो में मीरा कैमरे की तरफ देखकर बोल रही थी—
“अगर तुम ये वीडियो देख रही हो, तो इसका मतलब मेरी योजना सफल हो गई।”
मीरा की साँस रुक गई।
वीडियो में मीरा आगे बोली—
“आरव को ये कभी मत बताना कि तुम्हें सब याद आ गया है।”
मीरा ने स्क्रीन की तरफ देखा।
उसकी आँखों में डर था।
लेकिन असली डर आरव के चेहरे पर था।
“मीरा... ये क्या है?”
मीरा ने उसकी तरफ देखा।
और पहली बार उसके चेहरे पर एक अजीब मुस्कान आई।
“मुझे भी नहीं पता।”
वीडियो आगे चला।
पाँच साल पहले की मीरा कह रही थी—
“आरव को लगता है कि accident एक हादसा था।”
“लेकिन accident मैंने करवाया था।”
आरव के चेहरे का रंग उड़ गया।
वीडियो में मीरा आगे कहती रही—
“क्योंकि मुझे पता चल गया था कि आरव और कबीर दोनों मुझे धोखा दे रहे हैं।”
आरव पीछे हट गया।
“नहीं... ये झूठ है।”
वीडियो में मीरा की आवाज़ आई—
“मैंने दोनों को एक-दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल किया।”
“कबीर को लगा कि वह मुझे बचा रहा है।”
“आरव को लगा कि वह मुझे बचा रहा है।”
“लेकिन असल में दोनों मेरी चाल में फँस चुके थे।”
आरव ने काँपते हुए मीरा की तरफ देखा।
“तुम कौन हो?”
मीरा की आँखों में आँसू आ गए।
“मुझे नहीं पता।”
उसी समय laptop की screen पर वीडियो खत्म होने से पहले एक आखिरी line दिखाई दी—
“और सबसे जरूरी बात...”
कुछ सेकंड की खामोशी।
फिर वीडियो में मीरा मुस्कुराई।
“अगर आरव वापस आ गया है, तो उसे बता देना कि असली मीरा पाँच साल पहले मर चुकी है।”
वीडियो बंद।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
आरव ने धीरे से पूछा—
“तो तुम कौन हो?”
मीरा कुछ नहीं बोली।
तभी उसके फोन पर मैसेज आया।
“अब सच बताने का समय है।”
मैसेज के नीचे एक फोटो थी।
फोटो में असली मीरा अस्पताल के bed पर थी।
उसके पास डॉक्टर खड़ा था।
और फोटो की तारीख थी—
हादसे के बाद की।
फोटो के नीचे लिखा था—
“जिस लड़की को तुम मीरा समझ रहे हो... वह मीरा की जुड़वाँ बहन है।”
आरव के हाथ से फोन गिर गया।
मीरा की आँखों से आँसू बहने लगे।
“मुझे खुद नहीं पता था।”
आरव ने पूछा—
“तो तुम्हें क्या याद है?”
मीरा ने धीरे से कहा—
“बस इतना कि मैं तुम्हें बचाना चाहती थी।”
आरव उसकी तरफ बढ़ा।
लेकिन अचानक मीरा ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“नहीं।”
आरव रुक गया।
मीरा ने अपनी आँखें बंद कर लीं।
और जैसे ही उसने आँखें खोलीं—
उसका चेहरा पूरी तरह बदल चुका था।
अब उसमें डर नहीं था।
सिर्फ एक अजीब-सी शांति थी।
वह धीरे से बोली—
“क्योंकि मैं मीरा की बहन नहीं हूँ।”
आरव जम गया।
“फिर कौन हो?”
मीरा मुस्कुराई।
उसने अपना फोन आरव की तरफ बढ़ाया।
Screen पर एक video recording चल रही थी।
उसमें वही मीरा दिखाई दे रही थी।
लेकिन उसके पीछे खड़ा आदमी था—
कबीर।
और video में कबीर कह रहा था—
“अगर आरव कभी वापस आए... तो उसे मेरे पास मत लाना।”
मीरा ने video बंद कर दिया।
आरव ने काँपती आवाज़ में पूछा—
“तुम कबीर के साथ थीं?”
मीरा ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“तो फिर?”
मीरा उसके बिल्कुल करीब आई।
उसकी आँखों में आँसू थे।
और उसने धीरे से कहा—
“मैं वो लड़की हूँ जिसे तुम दोनों ने पाँच साल पहले मारने की कोशिश की थी।”
आरव पीछे हट गया।
मीरा ने अपना चेहरा उसके सामने किया।
“मेरा नाम मीरा नहीं है।”
एक पल की खामोशी।
फिर उसने कहा—
“मेरा नाम नैना है।”
आरव की आँखों में भय भर गया।
नैना ने उसकी तरफ देखा और कहा—
“और मैं पाँच साल से तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी।”
आरव ने दरवाज़े की तरफ भागने की कोशिश की।
लेकिन दरवाज़ा पहले से lock था।
नैना ने फोन पर एक button दबाया।
आरव का पूरा confession live recording में save हो चुका था।
पुलिस को location भेजी जा चुकी थी।
बाहर siren की आवाज़ सुनाई देने लगी।
आरव समझ गया—
पूरी मुलाकात...
पूरा प्यार...
सारे messages...
सब एक plan था।
लेकिन जाने से पहले उसने नैना से पूछा—
“एक बात का जवाब दो।”
नैना चुप रही।
“अगर ये सब बदला था... तो तुमने मुझसे प्यार क्यों किया?”
नैना की आँखों में आँसू आ गए।
वह कुछ सेकंड उसे देखती रही।
फिर बोली—
“क्योंकि बदला लेने आई थी...”
वह रुकती है।
“लेकिन तुम्हें सच में प्यार कर बैठी।”
आरव की आँखें नम हो जाती हैं।
नैना धीरे से कहती है—
“और शायद यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी।”
पुलिस दरवाज़ा खोलती है।
आरव को ले जाया जाता है।
नैना अकेली कमरे में रह जाती है।
वह पाँच साल पुरानी photograph उठाती है।
फोटो में असली मीरा और आरव हैं।
नैना फोटो को सीने से लगा लेती है।
उसकी आँखों से एक आँसू गिरता है।
फिर वह फोटो को उलटती है।
पीछे एक आखिरी लाइन लिखी है—
“नैना, अगर तुमने कभी आरव से सच में प्यार किया... तो उसे बचा लेना।”
नैना की आँखें बंद हो जाती हैं।
वह समझ जाती है—
जिस बहन को वह पाँच साल से मृत समझ रही थी...
वह मीरा ज़िंदा थी।
और उसने ही ये पूरा खेल शुरू किया था।
नैना धीरे से मुस्कुराती है।
फोन बजता है।
Screen पर नाम आता है—
MEERA ❤️
नैना call उठाती है।
दूसरी तरफ से सिर्फ एक आवाज़ आती है—
“दीदी... खेल खत्म नहीं हुआ।”
नैना की आँखें फैल जाती हैं।

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Disha Darshan Shah Patwa
6 hours agoI hope you all are like my story.