कमरा नंबर 13

HorrorMysteryThrillerShort-Stories
Listen to storyNarrated by VITI
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रात के बारह बज चुके थे।

पहाड़ों पर बारिश लगातार हो रही थी। घने कोहरे के बीच आरव की कार एक सुनसान सड़क पर आगे बढ़ रही थी।

बगल में बैठी मीरा ने उसकी तरफ देखा।

“आरव… अगर होटल सच में इतना डरावना हुआ तो?”

आरव मुस्कुराया।

“तो पूरी रात मेरा हाथ पकड़कर बैठना।”

“और अगर मुझे नींद आ गई?”

“तब भी हाथ नहीं छोड़ना।”

मीरा हल्के से मुस्कुराई।

“इतना प्यार?”

आरव ने उसकी उँगलियाँ अपनी उँगलियों में फँसा लीं।

“शादी से पहले जितना कर सकता हूँ, कर लेने दो।”

मीरा ने शर्माकर खिड़की की तरफ देख लिया।

कुछ देर बाद उनकी कार एक पुराने पहाड़ी होटल के सामने रुकी।

THE MIST HOUSE

रिसेप्शन पर एक बूढ़ा आदमी बैठा था।

उसने दोनों को देखा।

फिर आरव को कुछ ज्यादा देर तक घूरता रहा।

“कमरा?”

“13।”

बूढ़े के चेहरे पर अचानक गंभीरता आ गई।

उसने चाबी आगे बढ़ाई।

“एक बात याद रखना।”

“क्या?”

“रात में अगर कोई दरवाज़ा खटखटाए…”

वह कुछ पल रुका।

“तो दरवाज़ा मत खोलना।”

---

पहली रात

कमरे में पहुँचते ही मीरा ने अपना कोट उतारा।

आरव खिड़की के पास खड़ा पहाड़ों को देख रहा था।

मीरा पीछे से उसके पास आई।

“क्या देख रहे हो?”

“इतनी खूबसूरत जगह है… लेकिन पता नहीं क्यों कुछ अजीब लग रहा है।”

“मुझे तो बस तुम दिखाई दे रहे हो।”

आरव पलटा।

दोनों कुछ क्षण चुप रहे।

मीरा धीरे से उसके करीब आई।

आरव ने उसके चेहरे को अपने हाथों में थामा।

“मीरा…”

“हम्म?”

“तुम सच में मुझसे शादी करोगी?”

मीरा मुस्कुराई।

“नहीं।”

आरव ने हैरानी से देखा।

मीरा हँस पड़ी।

“पहले पूछो कि मैं तुम्हें प्यार करती हूँ या नहीं।”

“करती हो?”

मीरा ने उसके सीने पर सिर रख दिया।

“बहुत।”

आरव ने उसे बाँहों में भर लिया।

कुछ पल दोनों बस एक-दूसरे के करीब खड़े रहे।

उसकी उँगलियाँ मीरा के बालों में उलझ गईं।

मीरा ने आँखें बंद कर लीं।

आरव ने उसके माथे को चूमा।

फिर उसके गाल पर एक धीमा चुंबन।

मीरा ने उसकी शर्ट पकड़कर उसे अपने करीब कर लिया।

उनके बीच की दूरी खत्म हो गई।

बाहर तूफ़ान था।

अंदर सिर्फ उनकी साँसों की आवाज़।

तभी—

ठक… ठक… ठक…

दोनों अचानक अलग हुए।

दरवाज़े पर दस्तक थी।

फिर एक आवाज़ आई—

“आरव…”

मीरा ने आरव का हाथ पकड़ लिया।

“कौन है?”

बाहर से आवाज़ आई—

“मीरा… दरवाज़ा खोलो।”

मीरा का चेहरा सफेद पड़ गया।

“लेकिन… मैं तो यहाँ हूँ।”

दस्तक फिर हुई।

इस बार आवाज़ किसी लड़की की थी।

“आरव… तुम मुझे भूल गए?”

आरव के चेहरे पर डर उतर आया।

“नहीं…”

मीरा ने पूछा—

“कौन है?”

आरव ने जवाब नहीं दिया।

अचानक आईने पर धुंध जमने लगी।

और उस धुंध पर अपने-आप शब्द उभरे—

RIA

---

दूसरा दिन

सुबह होते ही दरवाज़ा खोला गया।

बाहर कोई नहीं था।

लेकिन फर्श पर गीले पैरों के निशान थे।

वे निशान कमरे से निकलकर होटल की पुरानी सीढ़ियों तक जा रहे थे।

मीरा ने उनका पीछा करना चाहा।

आरव ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“नहीं।”

“क्यों?”

“क्योंकि मुझे लगता है ये निशान हमें कहीं ले जाना चाहते हैं।”

“और अगर हमें सच जानना हो?”

आरव ने उसकी आँखों में देखा।

“तो हम साथ जाएँगे।”

---

पुरानी तस्वीर

होटल की लाइब्रेरी में उन्हें एक पुराना एल्बम मिला।

उसमें पाँच साल पुरानी तस्वीर थी।

एक लड़की।

रिया।

और उसके साथ आरव।

मीरा ने तस्वीर उठाई।

“तुमने कहा था तुम सिर्फ दोस्त थे।”

“थे।”

“क्या हुआ था?”

आरव ने नज़र झुका ली।

“रिया मुझसे प्यार करती थी।”

“और तुम?”

“मैं उसे दोस्त से ज्यादा कभी नहीं देख पाया।”

मीरा चुप रही।

“उस रात क्या हुआ?”

आरव ने कहा—

“हम इसी होटल में आए थे।”

“फिर?”

“हमारे बीच झगड़ा हुआ।”

“और?”

“मैं कमरे से बाहर चला गया।”

“जब वापस आए?”

“रिया गायब थी।”

अगली सुबह उसकी लाश होटल के पीछे मिली थी।

लेकिन हत्या किसने की—

यह कभी साबित नहीं हुआ।

---

वह रात

उस रात मीरा सो नहीं पा रही थी।

आरव उसके पास लेटा था।

मीरा ने धीरे से उसका हाथ पकड़ लिया।

“सो रहे हो?”

“नहीं।”

“डर लग रहा है।”

आरव उसकी तरफ मुड़ा।

“मुझे भी।”

मीरा उसके और करीब आ गई।

“फिर मुझे पकड़कर रखो।”

आरव ने उसे बाँहों में भर लिया।

मीरा ने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया।

“अगर कल कुछ हो गया तो?”

“कुछ नहीं होगा।”

“Promise?”

“Promise।”

आरव ने उसके माथे को चूमा।

मीरा ने उसकी गर्दन के पास चेहरा छिपा लिया।

उस पल दोनों के बीच डर से ज्यादा भरोसा था।

कुछ देर बाद उनकी आँखें मिलीं।

एक लंबा, भावनात्मक चुंबन हुआ।

मीरा ने उसका हाथ थाम लिया।

और दोनों एक-दूसरे की बाँहों में सिमट गए।

लेकिन उसी समय—

आईने में उनकी परछाइयों के पीछे रिया खड़ी थी।

उसके होंठ हिले—

“सच जानना है?”

मीरा ने पीछे देखा।

कोई नहीं था।

---

तहखाना

अगले दिन मीरा को कमरे की दीवार के पीछे एक गुप्त दरवाज़ा मिला।

वह और आरव नीचे तहखाने में पहुँचे।

वहाँ पुराने अखबार, तस्वीर और कई दस्तावेज़ रखे थे।

एक अखबार की कटिंग पर लिखा था—

“युवती की रहस्यमयी मौत।”

दूसरी तस्वीर में होटल के पुराने मालिक का बेटा था।

तीसरी तस्वीर में वही बूढ़ा मैनेजर।

और चौथी तस्वीर देखकर आरव ठिठक गया।

उसमें रिया किसी आदमी से बहस कर रही थी।

चेहरा साफ नहीं था।

सिर्फ उसकी कलाई पर एक खास तरह की घड़ी दिखाई दे रही थी।

आरव ने कहा—

“मैंने यह घड़ी पहले देखी है।”

मीरा ने पूछा—

“किसके पास?”

आरव कुछ बोलता, उससे पहले पीछे से आवाज़ आई—

“कुछ चीज़ें याद रखना खतरनाक होता है।”

दोनों पलटे।

बूढ़ा मैनेजर दरवाज़े पर खड़ा था।

लेकिन वह कुछ और कहता, उससे पहले—

बत्ती बंद हो गई।

---

अंतिम रात

होटल में अचानक अफरा-तफरी मच गई।

दरवाज़े बंद।

फोन काम नहीं कर रहे थे।

और ऊपर की मंजिल से किसी के चीखने की आवाज़ आई।

आरव और मीरा सीढ़ियाँ चढ़कर ऊपर पहुँचे।

गलियारे में खून के निशान थे।

एक कमरे का दरवाज़ा खुला था।

अंदर दीवार पर लिखा था—

“एक झूठा है।”

मीरा ने आरव की तरफ देखा।

“कौन?”

अचानक पीछे से आवाज़ आई—

“तुम्हें क्या लगता है?”

आरव पलटा।

वहाँ होटल का मालिक खड़ा था।

उसकी आँखों में अजीब गुस्सा था।

“रिया की मौत के बारे में बहुत सवाल पूछ रही हो।”

मीरा पीछे हट गई।

“आप उसे जानते थे?”

वह मुस्कुराया।

“जानता था?”

उसकी आवाज़ बदल गई।

“मैं उसे बहुत अच्छी तरह जानता था।”

आरव उसके सामने आ गया।

“तुमने उसे मारा?”

आदमी हँसा।

“तुम्हें लगता है हर चीज़ का जवाब इतना आसान है?”

अचानक पीछे से पुलिस की सायरन सुनाई दी।

मालिक भागने लगा।

आरव उसके पीछे दौड़ा।

लेकिन होटल के पुराने पुल के पास पहुँचते ही वह आदमी गायब हो गया।

सिर्फ उसकी घड़ी जमीन पर पड़ी थी।

वही घड़ी…

जो रिया की आखिरी तस्वीर में दिखाई दे रही थी।

---

असली सच

पुलिस ने होटल की तलाशी शुरू की।

लेकिन मीरा को कुछ और मिला।

पुरानी दीवार के अंदर छिपा एक छोटा कैमरा।

उसमें पाँच साल पुरानी रिकॉर्डिंग थी।

वीडियो में रिया कमरे नंबर 13 में खड़ी थी।

उसके सामने कोई आदमी था।

चेहरा दिखाई नहीं दे रहा था।

रिया कह रही थी—

“मैं सब पुलिस को बता दूँगी।”

आदमी ने कहा—

“तुम ऐसा नहीं करोगी।”

वीडियो अचानक बंद हो गया।

लेकिन आखिरी कुछ सेकंड में कैमरा नीचे गिरा था।

और फर्श पर दिखाई दे रही थी—

एक अंगूठी।

मीरा ने उसे देखते ही कहा—

“यह अंगूठी मैंने पहले देखी है।”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

“कहाँ?”

मीरा धीरे-धीरे पीछे मुड़ी।

दरवाज़े पर खड़ा था—

बूढ़ा मैनेजर।

उसकी उँगली में वही अंगूठी थी।

कमरे में सन्नाटा छा गया।

मीरा ने कहा—

“आप।”

बूढ़ा मुस्कुराया।

“बहुत देर से समझी।”

आरव ने अविश्वास से उसे देखा।

“तुमने रिया को मारा?”

“हाँ।”

मीरा स्तब्ध रह गई।

बूढ़ा आगे बढ़ा।

“रिया ने होटल के पुराने राज़ देख लिए थे। उसने सबूत जमा कर लिए थे। उस रात उसने मुझे धमकी दी कि वह पुलिस के पास जाएगी।”

आरव की आँखों में गुस्सा भर गया।

“और तुमने उसे मार दिया।”

बूढ़ा हँसा।

“लेकिन मैंने तुम्हें भी फँसा दिया।”

उसी क्षण कमरे की सारी खिड़कियाँ एक साथ बंद हो गईं।

हवा तेज़ हो गई।

आईने में रिया दिखाई दी।

इस बार उसके चेहरे पर डर नहीं था।

गुस्सा था।

बूढ़ा पीछे हटने लगा।

“नहीं…”

रिया धीरे-धीरे आईने से बाहर आती हुई दिखाई दी।

बूढ़ा चीख पड़ा।

“मुझे छोड़ दो!”

रिया ने सिर्फ एक बात कही—

“पाँच साल से इंतज़ार कर रही थी।”

अगले ही पल कमरे की लाइट चली गई।

जब रोशनी वापस आई—

बूढ़ा जमीन पर बेहोश पड़ा था।

और रिया गायब थी।

---

अंत

पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

रिया को आखिरकार न्याय मिल गया।

कुछ दिनों बाद आरव और मीरा होटल से हमेशा के लिए चले गए।

कार में मीरा ने आरव का हाथ पकड़ लिया।

“अब कभी ऐसी जगह नहीं आऊँगी।”

आरव मुस्कुराया।

“मैं भी नहीं।”

“Promise?”

“Promise।”

मीरा उसके कंधे पर सिर रखकर मुस्कुराई।

लेकिन तभी आरव के फोन पर एक अनजान नंबर से तस्वीर आई।

तस्वीर थी—

कमरा नंबर 13 की।

और उसमें आरव और मीरा खड़े थे।

लेकिन तस्वीर के पीछे…

रिया नहीं थी।

एक दूसरी परछाई खड़ी थी।

मैसेज आया—

“रिया की कहानी खत्म हुई है… मेरी नहीं।”

आरव ने धीरे-धीरे फोन मीरा से छिपा लिया।

मीरा ने पूछा—

“क्या हुआ?”

आरव ने उसकी तरफ देखा।

और पहली बार उसके चेहरे पर ऐसा डर था…

जो मीरा ने पहले कभी नहीं देखा था।

दूर पहाड़ों में बिजली चमकी।

और उसी क्षण फोन की स्क्रीन पर एक आखिरी शब्द दिखाई दिया—

“भागो…”

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