A Good Listener

DramaContemporaryShort-StoriesFriendship
Aug 05, 2026
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सोशल मीडिया के इस दौर में दुनिया भर के लोगों से जुड़ना पहले से कहीं ज़्यादा आसान हो गया है।

बस एक फ्रेंड रिक्वेस्ट या फॉलो रिक्वेस्ट से अनजान चेहरों के बीच बातचीत की शुरुआत हो जाती है। कुछ बातें कुछ दिनों में ही ख़ामोश हो जाती हैं, जबकि कुछ रिश्ते समय के साथ भरोसे, अपनापन और खूबसूरत यादों में बदल जाते हैं।

कभी-कभी एक अनजान प्रोफ़ाइल से शुरू हुई बातचीत ज़िंदगी की ऐसी कहानी बन जाती है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की होती।

आज ओमिका अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर रील्स देख रही थी। एक के बाद एक रील्स स्क्रॉल करते-करते अचानक उसकी नज़र मैसेज रिक्वेस्ट पर चली गई। यूँ ही जिज्ञासावश उसने रिक्वेस्ट खोल ली।

वहाँ एक अनजान लड़के का मैसेज था—

“Hi... Kunal. Kya aap Barabanki se hain?”

मैसेज पढ़ते ही ओमिका के होंठों पर मुस्कान आ गई। उसे समझ ही नहीं आया कि कोई किसी बिल्कुल अनजान इंसान से ऐसा सवाल कैसे पूछ सकता है।

कुछ पल सोचने के बाद उसने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली और शरारती अंदाज़ में जवाब टाइप किया—

“क्यों? अगर बाराबंकी से होती, तो क्या पूरा बाराबंकी मेरे नाम कर देते?”

मैसेज भेजते ही वह खुद ही हँस पड़ी। उसे बिल्कुल भी अंदाज़ा नहीं था कि यह छोटी-सी मज़ाकिया बातचीत उसकी ज़िंदगी की सबसे यादगार कहानियों में से एक बनने वाली है।

कुणाल ने बिना कोई देर किए जवाब दिया—

“अगर होती, तो कर ही देता।”

जवाब पढ़ते ही ओमिका के होंठों पर अनायास मुस्कान खिल उठी। एक अनजान इंसान का इतना बेफिक्र और मज़ाकिया जवाब उसे थोड़ा अजीब भी लगा और दिलचस्प भी। उसने सोचा, “अजीब लड़का है... लेकिन बातें करने का अंदाज़ अच्छा है।”

ओमिका की उम्र 26 वर्ष थी, जबकि कुणाल 27 वर्ष का था।

दोनों की ज़िंदगी एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थी।

एक ओर ओमिका थी, जो अपनी ज़िंदगी की कई उलझनों और ज़िम्मेदारियों से घिरी हुई थी। वह अपनी पढ़ाई में पूरी मेहनत से लगी थी और अपने भविष्य को बेहतर बनाने की कोशिश कर रही थी। उसके लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था।

वहीं दूसरी ओर कुणाल था। वह अपनी ट्रेनिंग पूरी कर रहा था। उसके स्वभाव में सादगी, आत्मविश्वास और हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहने की आदत थी। वह छोटी-छोटी बातों में भी खुशियाँ ढूँढ़ लेना जानता था और जीवन को पूरे उत्साह के साथ जीता था।

उस समय शायद उन दोनों में से किसी को भी यह एहसास नहीं था कि एक साधारण-सा ऑनलाइन मैसेज आने वाले दिनों में उनकी ज़िंदगी की सबसे खूबसूरत और सबसे यादगार कहानी की शुरुआत बनने वाला है।

यह पहली बार था जब ओमिका किसी अनजान इंसान से इतनी सहजता से बात कर रही थी। शुरुआत में उसे थोड़ी झिझक थी, लेकिन कुणाल के बात करने का तरीका ऐसा था कि धीरे-धीरे उसकी झिझक कम होने लगी।

कुणाल: “अच्छा ओमिका जी, बताइए... आपको क्या-क्या पसंद है?”

ओमिका: “मुझे एनीमे देखना, किताबें पढ़ना, प्रकृति के करीब रहना और कवितायें सुनना बहुत पसंद है।”

कुणाल (मुस्कुराते हुए): “अरे, सच में? सेम यहाँ भी! मैं भी एनीमे का बहुत बड़ा फैन हूँ। लगता है हमारी पसंद काफी मिलती-जुलती है।”

यह उनकी पहली लंबी बातचीत थी। दोनों एक-दूसरे के लिए अभी भी अजनबी थे, लेकिन बातचीत का सिलसिला धीरे-धीरे सहज होता जा रहा था।

समय बीतने के साथ कुणाल और ओमिका की बातचीत रोज़ होने लगी। अब उनके दिन की शुरुआत और अंत अक्सर एक-दूसरे के संदेशों से होने लगा था।

कुणाल डिफेंस की ट्रेनिंग कर रहा था। ट्रेनिंग के दौरान उसे फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती थी, इसलिए वह ओमिका के संदेशों का तुरंत जवाब नहीं दे पाता था। लेकिन जैसे ही ट्रेनिंग खत्म होती, सबसे पहले वह अपना फोन उठाता और उसके मैसेज पढ़कर जवाब देता।

धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे की दिनचर्या से परिचित हो गए। अब ओमिका को पता था कि दिन में कुछ घंटों तक कुणाल का कोई संदेश नहीं आएगा। फिर भी वह बेसब्री से उस पल का इंतज़ार करती, जब ट्रेनिंग खत्म होने के बाद उसके फोन की स्क्रीन पर कुणाल का मैसेज दिखाई देगा।

इन्हीं छोटी-छोटी बातों के बीच एक दिन कुणाल ने ओमिका को एक नया नाम दिया—

“Ms. Chasani.”

नाम सुनते ही ओमिका हँस पड़ी।

“ये कैसा नाम है?” उसने मुस्कुराते हुए पूछा।

कुणाल ने जवाब दिया, “क्योंकि आपकी बातों में मिठास है... बिल्कुल चाशनी जैसी।”

उस दिन ओमिका ने बस मुस्कुराकर बात टाल दी, लेकिन धीरे-धीरे उसे भी यह नाम अच्छा लगने लगा। शायद इसलिए, क्योंकि उस छोटे-से निकनेम में अपनापन, सम्मान और एक अनकहा लगाव छिपा था।

एक दिन बातचीत के दौरान कुणाल ने लिखा—

कुणाल: “Ms. Chasani... अपने बारे में कुछ बताइए।”

ओमिका: “क्या बताऊँ? आप कुछ पूछिए, फिर बताऊँगी।”

असल में ओमिका हमेशा यही कहती थी कि उसके पास कभी बातें ही नहीं होतीं। उसे समझ नहीं आता था कि बातचीत कहाँ से शुरू करे।

कुणाल मुस्कुराया और जवाब दिया—

“बातें अपने-आप नहीं आतीं, Ms. Chasani... जब बात करोगी, तभी तो बातें आएँगी।”

उस एक साधारण-से वाक्य ने ओमिका को भी मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। शायद पहली बार उसे लगा कि कोई उससे सिर्फ़ औपचारिक बातें नहीं, बल्कि उसे जानना चाहता है।

कुणाल: आपके परिवार में कौन-कौन हैं?

ओमिका: मम्मी, पापा, भैया, दादी... और भी बहुत सारे लोग।

कुणाल (मुस्कुराते हुए): अरे वाह! आपका परिवार तो बहुत बड़ा है। चाचा-चाची, ताऊ-ताई, दादा-दादी... सब साथ रहते होंगे?

ओमिका: जी।

कुणाल (हँसते हुए): फिर तो एक पूरा ज़िला ही बसा लो... इतना बड़ा परिवार है!

एक शाम बातचीत के दौरान कुणाल ने लिखा—

कुणाल: “Ms. Chasani... मुझे नहीं पता कि आप कैसी दिखती हैं, लेकिन आपकी बातें बहुत क्यूट होती हैं।”

ओमिका कुछ पल तक स्क्रीन को देखती रही। फिर मुस्कुराकर उसने जवाब दिया—

ओमिका: “लंबे बाल हैं, रंग साँवला है... और चेहरे पर एक छोटा-सा दाग भी है।”

कुछ देर तक स्क्रीन पर “Typing...” दिखाई देता रहा।

कुणाल ने जवाब दिया—

“चेहरे की पहचान दाग से नहीं, मुस्कान से होती है... और मुझे लगता है, आपकी मुस्कान भी आपकी बातों की तरह ही खूबसूरत होगी।”

कुणाल: “ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, Ms. Chasani... मेरी नज़र में हर इंसान अपने-अपने तरीके से खूबसूरत होता है।”

कुछ पल चुप रहने के बाद ओमिका ने लिखा—

ओमिका: “लेकिन... इस चेहरे के दाग की वजह से आज तक शायद मैं किसी को पसंद नहीं आई। कभी-कभी लगता है कि इस दुनिया में खूबसूरत होना भी ज़रूरी है।”

मैसेज पढ़कर कुणाल ने बिना देर किए जवाब दिया—

कुणाल: “खूबसूरती चेहरे से नहीं, दिल से होती है। जो इंसान दिल से खूबसूरत होता है, उसकी पहचान किसी दाग से नहीं होती।”

उस जवाब को पढ़कर ओमिका कुछ देर तक स्क्रीन को देखती रही। शायद किसी ने पहली बार उसके चेहरे के दाग से ज़्यादा उसके दिल को देखा था।

सबसे अनोखी बात यह थी कि कुणाल ने आज तक ओमिका को कभी देखा नहीं था, और न ही ओमिका ने कभी कुणाल की तस्वीर देखी थी।

उनकी दोस्ती किसी तस्वीर, वीडियो कॉल या चेहरे की खूबसूरती पर नहीं टिकी थी। वे एक-दूसरे को सिर्फ़ शब्दों, बातों और एहसासों के ज़रिए जान रहे थे।

शायद यही वजह थी कि उनके बीच बन रहा रिश्ता दिखावे से नहीं, बल्कि भरोसे और अपनापन से धीरे-धीरे आकार ले रहा था। हर सुबह लगभग एक जैसी शुरू होने लगी थी।

कुणाल: “Good Morning, Ms. Chasani. ☀️”

ओमिका: “Good Morning.”

कुणाल: “क्या कर रही हो?”

ओमिका: “Nothing much... बस ऐसे ही।”

कुणाल: “ओके। मैं अभी ट्रेनिंग के लिए जा रहा हूँ। ट्रेनिंग खत्म होने के बाद बात करता हूँ... शाम को मिलते हैं।”

ओमिका: “Hmm... अपना ध्यान रखना।”

हर दिन यही कुछ शब्द उनके बीच कहे जाते थे। बातचीत लंबी नहीं होती थी, लेकिन इंतज़ार लंबा होता था। ओमिका जानती थी कि शाम को ट्रेनिंग खत्म होने के बाद कुणाल का एक मैसेज ज़रूर आएगा, और शायद कुणाल भी जानता था कि कोई उसकी वापसी का इंतज़ार कर रहा है।

शाम होते ही हमेशा की तरह कुणाल का मैसेज आया।

कुणाल: “Good evening, Madam.”

ओमिका: “Good evening, Khadoos. 😊”

कुणाल: “डिनर हो गया?”

ओमिका: “Yes.”

कुणाल: “अपनी anxiety की दवा ले ली?”

ओमिका: “Yes.”

कुणाल अक्सर उसकी दवा, खाने और तबीयत के बारे में पूछता था। उसकी आदत बन गई थी कि वह छोटी-छोटी बातों का भी ख़याल रखे।

वहीं, ओमिका के लिए यह सब बिल्कुल नया था। उसने इससे पहले कभी किसी अनजान लड़के से इतनी लंबी बातचीत नहीं की थी। शुरू में उसे झिझक होती थी, लेकिन धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा कि हर अनजान इंसान एक जैसा नहीं होता। कुछ लोग बिना किसी स्वार्थ के सिर्फ़ आपका हाल भी पूछ लेते हैं, और कभी-कभी वही छोटी-सी परवाह दिल को सुकून दे जाती है।

कुणाल की सबसे ख़ास बात यह थी कि वह ओमिका की हर बात ध्यान से सुनता था—बिना बीच में टोके, बिना किसी निर्णय पर पहुँचे और बिना उसे जज किए।

धीरे-धीरे ओमिका भी उसके सामने बेझिझक अपने मन की हर बात कहने लगी। उसे महसूस हुआ कि हर इंसान को अपनी ज़िंदगी में बस एक ऐसा व्यक्ति चाहिए, जो उसे समझने से पहले उसे सुनना जानता हो।

शायद यही वजह थी कि ओमिका को कुणाल में एक “A Good Listener” दिखाई देता था।

हाँ, ऐसा बिल्कुल नहीं था कि दोनों के बीच कभी बहस नहीं होती थी। छोटी-छोटी बातों पर उनकी नोकझोंक भी हो जाती थी। लेकिन हर बार कुणाल गुस्से के बजाय धैर्य से बात करता, ओमिका की बात समझता और फिर प्यार से हर गलतफ़हमी दूर कर देता।

एक दिन मज़ाक-मज़ाक में कुणाल ने लिखा—

कुणाल: “तुम इतनी लड़ाकू क्यों हो? सच बताओ... लड़की हो या लड़का?” 😄

ओमिका हँस पड़ी।

ओमिका: “अरे नहीं... मैं सच में लड़की ही हूँ।”

कुणाल का ओमिका की ज़िंदगी में आना उसके लिए किसी छोटे-से चमत्कार जैसा था।

पिछले तीन-चार वर्षों में ओमिका ने लोगों से मिलना-जुलना बहुत कम कर दिया था। वह अपनी anxiety से जूझ रही थी और कई बार अपने ही विचारों में उलझ जाती थी।

लेकिन कुणाल से रोज़ होने वाली बातचीत ने उसके भीतर एक छोटा-सा बदलाव लाना शुरू कर दिया। वह पहले से थोड़ा खुलकर मुस्कुराने लगी, लोगों से बात करने लगी और अपनी भावनाएँ मन में दबाने के बजाय शब्दों में कहने लगी।

ओमिका अक्सर मुस्कुराते हुए कुणाल से कहती—

“तुम मेरी ज़िंदगी में बहुत lucky हो... और सबसे बढ़कर, तुम एक ‘Good Listener’ हो।”

कुणाल हर बार बस हल्का-सा हँस देता। शायद उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि उसकी आदत—बिना जज किए किसी की बात सुन लेना—किसी की ज़िंदगी में इतना बड़ा फ़र्क ला रही थी।

कुणाल और ओमिका के रिश्ते का नाम क्या था, यह शायद दोनों में से कोई भी नहीं जानता था।

वह दोस्ती थी, अपनापन था, या सिर्फ़ दो अनजान लोगों के बीच बना एक अनोखा भरोसा—इसका जवाब किसी के पास नहीं था।

लेकिन एक बात तय थी, कुणाल हमेशा ओमिका को मुस्कुराते हुए “Dude” कहकर बुलाता था।

कुणाल: “You are my dude.”

हर बार यह सुनकर ओमिका हँस पड़ती। उसे यह रिश्ता किसी नाम का मोहताज नहीं लगता था। कुछ रिश्ते बिना किसी पहचान के भी दिल में अपनी जगह बना लेते हैं।

ओमिका कुणाल की बहुत इज़्ज़त करती थी।

उसकी इज़्ज़त करने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि कुणाल ने कभी भी उससे उसकी तस्वीर माँगने की ज़िद नहीं की। उसने कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि वह कैसी दिखती है। उसके लिए ओमिका की पहचान उसकी बातें, उसकी सोच और उसका स्वभाव था।

दिन बीतते गए और दोनों की बातचीत हर रोज़ होने लगी।

कुणाल अक्सर अपनी दिनचर्या के बारे में बताता, ट्रेनिंग के अनुभव साझा करता और नई-नई किताबों पर चर्चा करता। वहीं ओमिका भी अपनी पढ़ाई, अपने सपनों और अपने मन की बातें उससे खुलकर कहने लगी।

और जब ओमिका पढ़ाई में लापरवाही करती, तो कुणाल उसे डाँट भी देता।

कुणाल: “Ms. Chasani... पढ़ाई से भागोगी तो सपने कैसे पूरे करोगी?”

ओमिका मुँह बनाकर बस इतना कहती—

“ठीक है, बाबा... पढ़ रही हूँ।”

उनकी दोस्ती में मज़ाक था, अपनापन था और सबसे बढ़कर एक-दूसरे के लिए सम्मान था। शायद इसी वजह से यह रिश्ता हर गुज़रते दिन के साथ और गहरा होता जा रहा था।

भरोसा करना भी अब स्वाभाविक लगने लगा था।

आख़िर कुणाल वही इंसान था, जिसकी बातों ने ओमिका को धीरे-धीरे फिर से अपने आप से जोड़ना शुरू कर दिया था। उसने उसकी परेशानियाँ सुनीं, उसे समझा और बिना किसी उम्मीद के उसका साथ दिया।

देखते ही देखते बात करते-करते सात-आठ महीने बीत गए।

अब दोनों बिना कुछ कहे भी एक-दूसरे के मन का हाल समझने लगे थे। कब किसी को हँसाना है, कब चुप रहकर सिर्फ़ सुनना है और कब सिर्फ़ “मैं हूँ” कहना काफ़ी होता है—यह सब उन्हें समय ने सिखा दिया था।

कुणाल अक्सर ओमिका से कहा करता था—

“Ms. Chasani... एक दिन ऐसा ज़रूर आएगा, जब तुम्हारे सारे सपने पूरे होंगे। बस खुद पर भरोसा मत खोना।”

यह सिर्फ़ एक वाक्य नहीं था। वह हर दिन किसी न किसी तरह ओमिका का हौसला बढ़ाता था। कभी पढ़ाई के लिए प्रेरित करता, कभी उसकी हिम्मत बढ़ाता और कभी सिर्फ़ यह याद दिलाता कि मुश्किल समय हमेशा नहीं रहता।

धीरे-धीरे ओमिका ने भी अपने भीतर बदलाव महसूस करना शुरू कर दिया। उसने हार मानने के बजाय एक-एक कदम अपने सपनों की ओर बढ़ाना शुरू किया।

शायद कुणाल ने उसे रास्ता नहीं दिया था, लेकिन इतना ज़रूर कर दिया था कि अब ओमिका को अपने कदमों पर फिर से भरोसा होने लगा था।

इन सात-आठ महीनों में कुणाल ने ओमिका की न जाने कितनी बातें सुनी थीं।

उसने उसके दर्द भी सुने, उसकी छोटी-छोटी खुशियाँ भी... और उसके बेवकूफ़ी भरे मज़ाकों पर खुलकर हँसा भी।

एक दिन...

कुणाल: “Hey, Dude.”

ओमिका: “Yes...”

कुणाल: “आज मूड ऑफ है क्या? पक्का किसी से लड़ाई हुई होगी।”

ओमिका: “अरे नहीं।”

कुणाल: “तो मैडम, आज इतने लेट रिप्लाई क्यों?”

ओमिका: “घर के काम कर रही थी।”

कुणाल: “अच्छा... घर के काम करने के बाद क्या करोगी?”

ओमिका ने हमेशा की तरह शरारती जवाब दिया—

ओमिका: “रोड पर झाड़ू लगाऊँगी... वहीं से सैलरी मिलती है मुझे।”

एक पल के लिए कुणाल सचमुच उलझ गया।

कुणाल: “सच में? तुमने नई जॉब ढूँढ़ ली?”

यह पढ़ते ही ओमिका ज़ोर से हँस पड़ी।

ओमिका: “हद है... मैं मज़ाक कर रही थी!” 😂

स्क्रीन के उस पार कुणाल भी मुस्कुरा दिया। उसे अब समझ आने लगा था कि ओमिका की आधी बातें मज़ाक होती हैं, और बाकी आधी भी कभी-कभी मज़ाक ही निकलती हैं।

कुणाल: “इतनी रात को रोड पर झाड़ू? मैडम, रात के 9 बज चुके हैं।”

ओमिका: “अरे... मैं चुड़ैल जो ठहरी। रात में ही काम करूँगी।” 😂

कुछ पल तक चैट में कोई जवाब नहीं आया।

फिर कुणाल ने लिखा—

कुणाल: “तुम सच में बहुत अजीब हो, Ms. Chasani.”

ओमिका: “पता है... लेकिन बोर तो नहीं होने देती।” 😄

यह पढ़कर कुणाल ज़ोर से हँस पड़ा। शायद यही वजह थी कि वह ओमिका से बात करना पसंद करता था। उसकी बातें कभी सीधी नहीं होती थीं, लेकिन हर जवाब में मासूमियत और हँसी ज़रूर होती थी।

देखते ही देखते नौ-दस महीने बीत गए।

समय के साथ कुणाल की ट्रेनिंग का समय भी बदल गया। कभी सुबह की ड्यूटी होती, तो कभी शाम की। उसकी दिनचर्या पहले से ज़्यादा व्यस्त हो गई थी।

फिर भी एक बात कभी नहीं बदली।

चाहे वह कितना भी व्यस्त क्यों न हो, ओमिका के संदेशों का जवाब देना नहीं भूलता था। कभी तुरंत, कभी थोड़ी देर से... लेकिन जवाब ज़रूर आता था।

ओमिका भी अब उसकी दिनचर्या समझने लगी थी। उसे पता था कि अगर जवाब देर से आ रहा है, तो उसकी वजह लापरवाही नहीं, बल्कि ट्रेनिंग है।

शायद यही समझ किसी भी रिश्ते को मज़बूत बनाती है—जहाँ शिकायतों से ज़्यादा एक-दूसरे की परिस्थितियों को समझा जाता है।

एक दिन कुणाल ने ओमिका से कहा कि वह अपने दोस्तों के साथ एक ट्रिप पर जा रहा है।

ओमिका ने मुस्कुराते हुए उसे शुभ यात्रा की शुभकामनाएँ दीं।

ट्रिप के दौरान कुणाल का सिर्फ़ एक ही संदेश आया। उसने एक मंदिर की तस्वीर भेजी और लिखा—

“अभी दर्शन करके आया हूँ।”

ओमिका ने बस इतना ही जवाब दिया—

“अच्छा... अपना ख़याल रखना और ट्रिप एंजॉय करना।”

उसने जानबूझकर ज़्यादा संदेश नहीं किए। उसे लगा कि कुणाल अपने दोस्तों के साथ है, इसलिए उसे खुलकर समय बिताने देना चाहिए।

लेकिन... वह एक तस्वीर ही आख़िरी संदेश बन जाएगी, यह ओमिका ने कभी नहीं सोचा था।

उसके बाद कुणाल का कोई संदेश नहीं आया।

पहले एक दिन बीता...

फिर एक हफ़्ता...

फिर एक महीना...

धीरे-धीरे कई महीने गुज़र गए।

हर सुबह ओमिका इंस्टाग्राम खोलती, उम्मीद करती कि शायद आज “Hey Dude” का कोई संदेश होगा।

लेकिन हर बार स्क्रीन पर सिर्फ़ वही पुरानी चैट दिखाई देती... और सबसे आख़िरी में वही मंदिर की तस्वीर।

इंतज़ार धीरे-धीरे उसकी आदत बन गया था।

उसे नहीं पता था कि कुणाल कहाँ है, कैसा है या उसने अचानक बात करना क्यों बंद कर दिया।

उसे बस इतना पता था कि वह आज भी कभी-कभी अनजाने में उसी चैट को खोलकर बैठ जाती थी।

लेकिन जब भी ओमिका को कुणाल की याद आती, उसकी आँखों में आँसू नहीं आते थे।

क्योंकि कुणाल उसे सिर्फ़ यादें देकर नहीं गया था... वह उसे ज़िंदगी को फिर से जीना सिखाकर गया था।

उसने उसे सिखाया था कि अपनी बात कहना कमजोरी नहीं होती, कि सपनों पर भरोसा करना चाहिए और यह भी कि दुनिया में ऐसे लोग भी होते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के आपकी बातें सुन लेते हैं।

आज भी ओमिका जब कुणाल को याद करती है, तो उसके चेहरे पर एक हल्की-सी मुस्कान आ जाती है।

वह हमेशा उसे सम्मान के साथ याद करती है और मन ही मन बस यही दुआ करती है—

“जहाँ भी हो... खुश रहना, Dude.”

शायद कुछ रिश्तों का अंत मिलन से नहीं होता।

कुछ रिश्ते इसलिए याद रह जाते हैं, क्योंकि उन्होंने हमें बेहतर इंसान बनना सिखाया होता है।

ज़िंदगी में कभी-कभी कुछ लोग हमेशा के लिए हमारी ज़िंदगी में रहने नहीं आते।

वे बस कुछ समय के लिए आते हैं... लेकिन उस थोड़े-से समय में हमें जीने का नया नज़रिया दे जाते हैं, खुद पर भरोसा करना सिखा जाते हैं और कुछ ऐसी यादें छोड़ जाते हैं जो उम्रभर साथ रहती हैं।

ओमिका की ज़िंदगी में भी कुणाल कुछ ऐसा ही था।

एक अनजान इंसान...

जो कभी उसका अपना नहीं कहलाया, लेकिन फिर भी उसकी ज़िंदगी का एक बेहद ख़ास हिस्सा बन गया।

ओमिका के लिए कुणाल सिर्फ़ एक दोस्त नहीं था।

वह एक “A Good Listener” था—एक ऐसा इंसान जिसने बिना जज किए उसकी हर बात सुनी, उसका हौसला बढ़ाया और उसे फिर से मुस्कुराना सिखाया।

शायद कुछ रिश्तों को नाम की ज़रूरत नहीं होती।

वे सिर्फ़ दिल में सम्मान बनकर हमेशा ज़िंदा रहते हैं।

जब भी ओमिका को कुणाल की याद आती, उसके मन में उसके लिए सम्मान और भी बढ़ जाता।

वह अक्सर मन ही मन कहती—

“तुम सच में बहुत अच्छे इंसान हो, कुणाल।”

शायद ज़िंदगी में उसे कुणाल जैसा दोस्त फिर कभी नहीं मिला।

लेकिन उसे इस बात का कोई अफ़सोस नहीं था।

क्योंकि कुछ लोग हमारी ज़िंदगी में हमेशा साथ रहने के लिए नहीं आते, बल्कि हमें इतना मज़बूत बना जाते हैं कि उनके जाने के बाद भी उनकी सीख हमारे साथ रहती है।

कुणाल भी ओमिका की ज़िंदगी में ऐसा ही एक इंसान था—जिसने उसे बिना किसी उम्मीद के सुना, समझा और उसे यह एहसास दिलाया कि दुनिया में आज भी अच्छे लोग मौजूद हैं।

ओमिका (मन ही मन):

“कुणाल... पता नहीं तुम आज कहाँ हो, कैसे हो... लेकिन तुम्हारे लिए मेरे मन में सम्मान हर दिन और बढ़ता जाता है।

तुमने मुझे कभी जज नहीं किया, कभी मेरी तस्वीर नहीं माँगी, कभी मेरी कमियों का मज़ाक नहीं बनाया। तुमने बस मेरी बातें सुनीं, मुझे समझा और हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया।

शायद मेरी ज़िंदगी में तुम जैसा दोस्त फिर कभी नहीं आया।

Thank you, Kunal...

मेरी ज़िंदगी में एक ‘A Good Listener’ बनने के लिए।

जहाँ भी हो... हमेशा खुश रहना। तुम्हारी दी हुई सीख और तुम्हारा सम्मान मेरे साथ हमेशा रहेगा।”

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Neetu its
1 weeks ago

💕❤️