Published 1 day agoAakari khat
डाकघर के एक पुराने कोने में, धूल से ढका एक ख़त वर्षों से चुपचाप पड़ा था।उसे कभी किसी ने ढूँढा नहीं, और न ही वह कभी अपनी मंज़िल तक पहुँच सका।अजय मेहता, जो कुछ ही दिनों में सेवानिवृत्त होने वाले थे, अपनी मेज़ साफ़ कर रहे थे। चार दशकों की नौकरी में उन्होंने हज़ारों ख़त लोगों तक पहुँचाए थे—किसी के लिए ख