बस एक पल

जून का महीना शुरू ही हुआ था कि मानसून ने दस्तक दे दी। किसी को बारिश बहुत पसंद थी, तो किसी को बिल्कुल नहीं। उन्हीं लोगों में से एक था आर्यन, जिसे बारिश ज़रा भी पसंद नहीं थी।
उसे बारिश की ठंडी बूँदों से ज़्यादा पसंद थी साफ़ धूप और खुला आसमान। लेकिन उस दिन की बारिश उसके लिए बाकी दिनों से कुछ अलग होने वाली थी...
क्योंकि उसे क्या पता था कि बारिश के इसी मौसम में उसकी मुलाक़ात ईशा से होने वाली है।
“आर्यन, उठ जाओ बेटा... सुबह हो गई।”
शकुंतला ने कमरे के बाहर से आवाज़ लगाई।
आर्यन ने करवट बदलते हुए आँखें खोलीं। बाहर बारिश की बूँदें लगातार खिड़की पर दस्तक दे रही थीं। उसने खिड़की की तरफ़ देखा और फिर तकिया अपने चेहरे पर रख लिया।
“माँ... आज तो बारिश हो रही है, मुझे नहीं उठना,” आर्यन ने उनींदी आवाज़ में कहा।
शकुंतला मुस्कुराईं और बोलीं, “बारिश हो रही है, इसलिए तो उठो। कब तक बिस्तर में पड़े रहोगे?”
आर्यन ने बिना कुछ कहे फिर से आँखें बंद कर लीं।
आर्यन उठा और ऑफिस जाने के लिए तैयार होने लगा।
तभी उसकी बहन नेहा ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा,
“आर्यन, आज मौसम कितना अच्छा है। लगता है आज बारिश होगी।”
आर्यन ने घूरकर नेहा की तरफ़ देखा और बोला,
“चुप हो जा, नेहा! अगर बारिश शुरू हो गई तो मैं ऑफिस कैसे जाऊँगा? भीग जाऊँगा।”
नेहा हँसते हुए बोली,
“तो क्या हुआ? कभी-कभी बारिश में भीगने में भी मज़ा आता है।”
आर्यन ने अपना बैग उठाया और कहा,
“तुम्हें अच्छा लगता होगा, मुझे बिल्कुल नहीं।”
इतना कहकर वह ऑफिस के लिए निकलने लगा।
आर्यन अपनी बाइक स्टार्ट करके ऑफिस के लिए निकल पड़ा। अभी वह आधे रास्ते तक ही पहुँचा था कि अचानक बारिश शुरू हो गई।
आर्यन ने आसमान की तरफ़ देखते हुए कहा,
“हे भगवान! थोड़ी देर बाद बारिश होती तो क्या हो जाता?”
उसने अपनी बाइक सड़क के किनारे खड़ी की और पास ही बने एक छोटे-से बस स्टैंड की तरफ़ चला गया। वहाँ पहले से ही कुछ लोग बारिश से बचने के लिए खड़े थे।
आर्यन भी एक कोने में जाकर खड़ा हो गया।
बारिश लगातार तेज़ होती जा रही थी। आर्यन कभी आसमान की तरफ़ देखता तो कभी सड़क पर जमा होते बारिश के पानी को।
वह मन ही मन बड़बड़ाने लगा,
“पता नहीं लोगों को बारिश इतनी पसंद क्यों है? सारा रास्ता खराब कर देती है... ऊपर से ऑफिस पहुँचने में भी देर होगी।”
तभी ईशा भी अपनी स्कूटी को एक तरफ़ खड़ा करके उसी बस स्टैंड की तरफ़ जाने लगी।
आर्यन अभी बारिश को लेकर बड़बड़ा ही रहा था कि तभी उसकी नज़र एक लड़की पर पड़ी, जिसने पीले और हरे रंग का सलवार-कमीज़ पहन रखा था।
आर्यन उस लड़की को एकटक देखता ही रह गया।
वह ईशा थी। साँवला रंग, लंबे बाल, कानों में बड़े-बड़े झुमके और माथे पर छोटी-सी बिंदी, उसके चेहरे की खूबसूरती को और बढ़ा रहे थे। बारिश की बूँदें उसके बालों से होकर उसके चेहरे तक आ रही थीं।
जैसे ही ईशा बस स्टैंड के नीचे पहुँची, उसने अपने बालों को हाथों से झटककर उनमें लगी बारिश की बूँदों को हटाने की कोशिश की। जब भी वह अपने बालों से बारिश की बूँदें झटकती, उसके हाथों में पहनी चूड़ियाँ खनक उठतीं।
आर्यन को उन चूड़ियों की खनक किसी मधुर संगीत जैसी लग रही थी। वह कुछ पल के लिए बारिश और अपने ऑफिस जाने की चिंता तक भूल गया।
जैसे आर्यन को उसी एक पल में ईशा से प्यार हो गया हो।
जो आर्यन कुछ देर पहले तक बारिश को कोस रहा था, अब वही मन ही मन चाहने लगा था कि बारिश इतनी जल्दी न रुके।
वह खुद भी हैरान था कि कुछ ही पलों में बारिश को लेकर उसकी सोच इतनी कैसे बदल गई।
एक घंटे बाद बारिश रुक गई।
ईशा अपनी स्कूटी लेकर वहाँ से चली गई। वहीं आर्यन बस स्टैंड पर खड़ा होकर उसे जाते हुए देखता रहा। वह उसे तब तक देखता रहा, जब तक ईशा उसकी आँखों से ओझल नहीं हो गई।
कुछ देर बाद आर्यन भी अपनी बाइक के पास गया, बाइक स्टार्ट की और ऑफिस की तरफ़ निकल पड़ा।
लेकिन उसके मन में अब भी वही चेहरा और चूड़ियों की खनक गूँज रही थी।
जो आर्यन कुछ देर पहले तक बारिश से चिढ़ रहा था, आज वही बारिश होने पर पहली बार खुश हुआ था।
शायद इसलिए नहीं कि उसे बारिश पसंद आने लगी थी, बल्कि इसलिए कि उसी बारिश ने उसे ईशा से मिलवाया था।
लेकिन आर्यन जब भी उस रास्ते से गुजरता, उसकी नज़रें अनायास ही उसी बस स्टैंड की तरफ़ उठ जातीं। शायद उसे उम्मीद होती कि कहीं ईशा फिर से उसे दिखाई दे जाए।
वह हर बार उसी जगह को कुछ पल के लिए देखता और फिर आगे बढ़ जाता।
अब तो उसे बारिश का भी इंतज़ार रहने लगा था।
क्योंकि वही बारिश थी, जिसने उसे पहली बार ईशा से मिलवाया था।
उसे मालूम था कि शायद वह ईशा से फिर कभी नहीं मिलेगा, फिर भी उसके दिल में एक छोटी-सी उम्मीद हमेशा बनी रहती थी।
आर्यन मन ही मन सोचने लगा,
“काश... मैं उस लड़की से फिर कभी बारिश में मिल पाऊँ।”
यही सोचकर उसके चेहरे पर हल्की-सी मुस्कान आ गई।
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